Monday, September 21, 2026

शिव भजन

 शिव भजन 

*********

अमृत जग में बाँट के, विष का प्याला पीने वाले 

नीलकंठ , हे, नीलकंठ !


भक्तों की खुशियों में , खुश हो के जीने वाले 

नीलकंठ , हे, नीलकंठ !


जटाओं में पावन गंगा विराजे 

कंठ में सर्प का हार साजे 

शिव भजन (RE-EDITED)

  शिव भजन 

*********

अमृत जग में बाँट के, विष का प्याला पीने वाले 

नीलकंठ , हे, नीलकंठ !


भक्तों की खुशियों में , खुश हो के जीने वाले 

नीलकंठ , हे, नीलकंठ !


जटाओं में पावन गंगा विराजे 

कंठ में सर्प का हार साजे 


भभूत का श्रृंगार किये तुम 

मृग छाल के आसन पर विराजे 


अपनी धुन में मगन तुम 

डम -डम डमरू बाजे 


तुम बसते रोम रोम, सृष्टि के घट घट 

हर लेना मेरी विपत्ति विकट


 तुम संकटहर्ता, विघ्न विनाशक , मंगलकर्ता 

रखना मुझ पर भी वरद हस्त 

नीलकंठ, हे, नीलकंठ !


रजनी छाबड़ा 


श्रीराम की दीवानी

श्रीराम की दीवानी 


भजन : १ 
श्रीराम की दीवानी हो गयी मैं 
तेरे नाम की दीवानी हो गई मैं 

तेरा नाम जपूँ मैं, जपती जाऊं 
तेरे गुणगान में गाऊँ ,गाती जाऊं 

तुझ में ही रमा मन मेरा 
तेरी ही धुन गाती जाऊं, गाती जाऊँ 

रोम रोम में बस  गए तुम 
तुम्हें अब कैसे बिसराऊँ 

तुम्हीं से मेरी सुबह, हे राम !
तुम्हीं से मेरी शाम ,हे राम 

आठों प्रहर जपूँ तेरा नाम 
मोह-माया का अब क्या काम 

सांस की डोर टूटे तो टूटे 
तुमसे नाता कैसे तोड़ पाऊँ 

श्रीराम की दीवानी हो गयी मैं 
तेरे नाम की दीवानी हो गई मैं 

रजनी छाबड़ा 
गीतकार 

17/6/2026

Saturday, September 19, 2026

SUR AUR SAAZ


 

MY NEW YOUTUBE CHANNEL   https://www.youtube.com/@RAJNILYRICIST

Friday, September 18, 2026

कुछ यूं

  कुछ यूं हुए , मोहब्बत के सिलसिले 

जैसे नमक पानी में घुले 


याद कीजिये वो दिन

 याद कीजिये वो दिन 

***************** 

 याद कीजिये वो दिन 

जज़्बात  उभरा करते थे 

कल-कल करते निर्झर सी 

रवानी लिए 


कलम -कागज़ उठाया

उढेल दिए जज़्बात  

सरलता से लिख डाली 

मन की हर बात 


मुँह -जबानी भी 

शब्दों को मिलती थी  रवानी 

पीढ़ी  दर पीढ़ी 

सुनाए जाते थे 

वीर गाथाएँ और कहानी 


इंसान के दिलऔर दिमाग के बीच 

नहीं था कोई कंप्यूटर 

थिरकती उँगलियों से 

थिरकते जज़्बात  

लिख दिए जाते थे 

बरबस कोरे कागज़ पर 


कंप्यूटर के चलन ने 

बदल दिया लिखने का सलीका 

किताब और पाठक का रिश्ता 

उँगलियों में लग रहे जंग 

और सूखने लगी स्याही 

लेखनी कागज़ के संग 

रह गयी अनब्याही /


Saturday, September 12, 2026

AAGOSH



https://youtu.be/6tAgW0ALImA?si=CD3kSSBp9Apnvlc9