Friday, September 18, 2026

कुछ यूं

  कुछ यूं हुए , मोहब्बत के सिलसिले 

जैसे नमक पानी में घुले 


याद कीजिये वो दिन

 याद कीजिये वो दिन 

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 याद कीजिये वो दिन 

जज़्बात  उभरा करते थे 

कल-कल करते निर्झर सी 

रवानी लिए 


कलम -कागज़ उठाया

उढेल दिए जज़्बात  

सरलता से लिख डाली 

मन की हर बात 


मुँह -जबानी भी 

शब्दों को मिलती थी  रवानी 

पीढ़ी  दर पीढ़ी 

सुनाए जाते थे 

वीर गाथाएँ और कहानी 


इंसान के दिलऔर दिमाग के बीच 

नहीं था कोई कंप्यूटर 

थिरकती उँगलियों से 

थिरकते जज़्बात  

लिख दिए जाते थे 

बरबस कोरे कागज़ पर 


कंप्यूटर के चलन ने 

बदल दिया लिखने का सलीका 

किताब और पाठक का रिश्ता 

उँगलियों में लग रहे जंग 

और सूखने लगी स्याही 

लेखनी कागज़ के संग 

रह गयी अनब्याही /


Saturday, September 12, 2026

AAGOSH



https://youtu.be/6tAgW0ALImA?si=CD3kSSBp9Apnvlc9

Saturday, September 5, 2026

TUM MERA AAINA

 https://youtu.be/xqpMf1fb5b0?si=X4gu-PjiHJnItHSf


Wednesday, August 26, 2026

समंदर कब किसी की प्यास बुझाता है

 समंदर कब किसी की प्यास बुझाता है 

यह  हुनर तो दरिया को ही आता ही 


ताड़ का पेड़ कब छाया देता है किसी को 

छाया तो घना पीपल ही पहुंचाता है 


तेज़ रफ़्तार हवाएं बस  जड़ से  उखाड़ देती हैं 

सुकून तो मंद बयार  का झोंका  ही लाता है 


ऊंची मीनारें सुकून देती हैं नज़रों को 

बसेरे के काम तो आशियाना ही आता है/


रजनी छाबड़ा 

बहु भाषीय कवयित्री व् गीतकार 

26/8 /2026 

Saturday, August 15, 2026

Thursday, August 13, 2026

लहरिया ओढ़ा तेरे नाम का

  


लहरिया ओढ़ा तेरे नाम का 

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लहरिया ओढ़ा तेरे नाम का 

खुशियों के सब रंग ओढ़ लिए 

लाल रंग प्यार का विस्तार 

केसरिया शुचिता का आधार 

पीला रंग सुनहली धूप का आभास 

नीला रंग तेरे प्रेम सरीखे गगन का विस्तार 

हरित रंग  जीवन में हरीतिमा 


सावन के  झूलों के संग हिलोरे लेती मैं 

तेरे प्यार की पींग में झूलती 

तन मन की सुध भूलती 


कान्हा, मेरे कान्हा, मेरे कान्हा 

दिन रात बस तेरी आराधना 


सारी दुनिया बिसरा दी 

सुन तेरी बांसुरी की तान  


रजनी छाबड़ा 

बहु भाषीय कवयित्री व् गीतकार 


14 /8 /2026