श्रीराम की दीवानी
तुम मेरा आइना हो गए
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तुम मेरा आइना हो गए
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रेड रिबन यू टयूब म्यूजिक चैनल, मुंबई द्वारा आज 'तुम मेरा आईना हो गए ' का पोस्टर आज रिलीज़ किया गया / इस म्यूजिक एल्बम में चार ग़ज़ल शामिल की गयी है/ सर्वप्रथम "तुम मेरा आईना हो गए शीघ्र ही रिलीज़ की जा रही है/ तदुपरांत अन्य तीन ग़ज़लों का लोकार्पण किया जायेगा/
बीकानेर की सुप्रसिद्ध बहुभाषीय कवयित्री, अनुवादिका व् अंकशास्त्री द्वारा लिखी गई ग़ज़ल तुम मेरा आईना हो गए' को स्वर दिए हैं, मुंबई इंडस्ट्री के जाने माने म्यूजिक डाइटेक्टर व् गायक रफ़ीक राजा जी ने/ म्यूजिक डाइरेक्टर भी आप ही हैं/ रफ़ीक जी मूलतः बीकानेर से है , परन्तु गत २५ वर्षों से मुंबई इंडस्ट्री में म्यूज़िक डायरेक्टर व् गायक के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान बना चुके हैं व् विदेशों में भी कई कार्यक्रम दे चुके है/ उम्मीद करते हैं कि यह गज़ले आपकी दुआओं से लोकप्रिय होंगी/
बीज़ से बरगद तक
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धरती के स्नेहिल आँचल से उपजा और पोषित बीज धीरे धीरे पनपता है और कभी कभी ईश्वरीय अनुकम्पा और परिवार व् समाज के स्नेह से बरगद सरीखा विस्तार पा लेता है/
इस उक्ति के माध्यम से में इंगित कर रही हूँ एक ऐसे बहु आयामी व्यक्तित्व के स्वामी के जीवन वृत्त को, जो केवल हमारे साहित्य जगत का ताज ही नहीं, मानवीय गुणों की भी खान है/ उनके बारे में विश्व भर के विद्वानों और साहित्य प्रेमियों ने वृहद स्तर पर लिखा है और आज में उनके बारे में अपनी अनुभूतियाँ कल
मबद्ध करने का प्रयास कर रही हूँ/ जी हाँ, मैं जिक्र कर रही हूँ , डॉ. जरनैल सिंह आनंद का. एक ऐसी शख्शियत जो ग्रामीण अंचल में इस धरा पर अवतरित हुए , परन्तु सम्पूर्ण विश्व के आँगन में छा गए/
19 जनवरी 1956 में लुधियाना जिले के आलमगीर गांव में जन्मे इस शिशु से विश्व भर में भारत को अनूठी पहचान दिला दी है,अपनी सृजनात्मक उपलब्धियों व् मानवीय सद्गुणों के वैश्विक स्तर पर प्रचार के माध्यम से /
THE POETIC ODYSSEY ( THE LIFE OF LEGACY OF DR . JERNAIL S ANAND ) BY RUPA RAO के शुचि शर्मा द्वारा किये गए हिंदी अनुवाद 'एक काव्यात्मक ओडिसी : डॉ जरनैल सिंह आनंद ; जीवन और विरासत को पढ़ने के बाद , आप विस्मित हो जाएंगे कि कैसे एक साधारण परिवेश में पला शिशु, अपनी जिजीविषा से जीवन के निर्धारित लक्ष्य प्राप्त करने के बाद , मानवीय आदर्शों के प्रसार के लिए आजीवन प्रयत्न रत है/
नन्हा सा बीज धरती का सीना चीर , धीमे धीमे पनपता हुआ, विशाल बरगद का अकार ले लेता है, अपनी जिजीविषा और संघर्ष के बल पर/ इसके उपरान्त उसकी फली फूली शाखाएं फिर से धरती में जड़ें पकड़ने लगती है/ कुछ ऐसी ही है, डॉ. आनंद की जीवन शैली/ उन्होंने जो ज्ञान ता-उम्र अर्जित किया , उसका प्रचार प्रसार विश्व भर के आँगन में निरंतर हो रहा है/
शुचि शर्मा द्वारा हिंदी में अनुदित एक काव्यात्मक ओडिसी : डॉ जरनैल सिंह आनंद ; जीवन और विरासत के माध्यम से आप डॉ आनंद के जीवन के सजीव चित्रण का आनंद ले पाएंगे/
प्रीत की रीत
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पानी में घुले नमक के एहसास सा
मुझ में घुल गए हो तुम
नहीं नज़र आते कहीं भी
हर पल मुझ में ही हो तुम
पावस के पानी की बूंद
दुनिया से छुपा के
अंतस में सहेज के
रख लेती है सीप
अजब है यह प्रीत की रीत
मितवा के मीत सी, खामोश गीत सी/
रजनी छाबड़ा
