Friday, February 6, 2026

उन्मुक्त उड़ान




उन्मुक्त उड़ान 

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युगों से 

पिंजरे में क़ैद 

पंछियों ने 

मुक्ति की योजना बनाई 


बहलिए से विनती की 

पिंजरे से मुक्त करने की 

नभ का विशाल विस्तार 

उन्हें मानो उकसा रहा था 

बेड़ियाँ तोड़ने के लिए 


मन ही मन भयभीत थी 

विस्तृत आकाश में 

उन्मुक्त उड़ान लेने से पहले 

जहाँ चीलें और गिद्ध भी 

अपने बड़े बड़े पंख पसारे 

नुकीली चोंच, तीखे पंजों 

और शिकार के लिए 

पैनी दृष्टि के साथ 

उन्मुक्त उड़ते रहते हैं 

कहीं उन पर 

जानलेवा हमला न कर दें 


बहलिए ने उन्हें 

चेताने की कोशिश की 

पर ज़िद पर उतारू 

चिड़ियों के समक्ष 

झुकना ही पड़ा उसे 


अलग थलग उड़ने की बजाय 

वे उड़ी झुंड में 

उनका यह चातुर्य देख कर 

अब चीलें भी 

सकते में आ गयी 


दृढ इच्छा शक्ति से भरी 

एक सुगठित सेना 

जो परवाह नहीं करती 

विषम परिस्थितियों की  

डटी रहती है चट्टान सरीखी 

उस सेना पर आक्रमण करना 

 कभी भी आसान नहीं होता 


अब बहेलियों ने भी 

बदल डाली है अपनी सोच 

ख़ुशियों से भरपूर 

फड़फड़ाते पँखों को देख 

और अपेक्षाकृत पसंद करते है 

पंछी यूं ही आनंद लेते रहें 

उन्मुक्त उड़ान का /


रजनी छाबड़ा 

बहु भाषीय कवयित्री व् अनुवादिका 


Thursday, January 22, 2026

Thursday, January 8, 2026

  सृजन सेवा संस्थान , श्रीगंगानगर द्वारा साहित्यिक योगदान के लिए सृजन साहित्य सम्मान २०२६ प्रदान किया गया /

 'तिनका- तिनका नेह'    इसमें टाइटल और  पूरी किताब में '        '  नहीं लगाने है   तिनका तिनका नेह लिखिए /

शीर्षक में डैश की जगह छोटा हाइफ़न लगाइये/

कविता  १, लाइन १ आंकलन 

कविता १६     अपना अपना अंदाज़       शीर्षक में डैश की जगह छोटा हाइफ़न लगाइये/

  कविता २८   आख़िरी लाइन से ? हटा दीजिये 

कविता २९  पैरा २ की लाइन ३   में में  हटाना है 

कविता ३० लाइन ३    सरीखे 

कविता ३१  हटाइये,  यह कविता १९ नंबर पे आ चुकी है/ इसकी जगह् यह दूसरी कविता लगाइये


परछाई 

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 रात में तनहा सड़क पर 

संग संग अंधेरे में 

उभरती लंबी पतली परछाई 

उदास लंबी रात सी ही होती है 

दूर तक फ़ैली हुए/  


दिन काम की व्यवस्तता में 

छोटा सा प्रत्तीत होता है 

दिन में उभरने वाली छोटी 

परछाई समान /

पेज  ३५  फूली फूली रोटियां  ,    दिन भर की थकान          दोनों में  डैश की जगह छोटा हाइफ़न लगाइये/

पूरी  बुक में जहाँ जहाँ भी डैश  है, कमांड से हाइफ़न लगा लीजिये/

कविता ३९  नीच से दूसरी लाइन     यूं ही 

कविता ३९  आख़िरी लाइन     युग-युगांतर 

पेज ८३ पे कविता के नीचे मेरा नाम नहीं लिखना है/

Monday, January 5, 2026

सृजन सेवा संस्थान के मासिक कार्यक्रम 'लेखक से मिलिए' की १३६ वीं कड़ी





 सृजन सेवा संस्थान के मासिक कार्यक्रम 'लेखक से मिलिए' की १३६ वीं कड़ी  के अंतर्गत  ४ जनवरी , 2026 को  श्री गंगानगर में प्रबुद्ध श्रोतागण के समक्ष काव्य प्रस्तुति, अनुवाद से सम्बंधित कुछ मुद्दों पर चर्चा एवं अंकशास्त्र से सम्बंधित कुछ पहलुँओं पर बातचीत का अवसर मिला/ मैं  सृजन संसथान के आभारी हूँ मुझे यह सुअवसर प्रदान करने के लिये/ मीडिया के प्रति भी हार्दिक आभार शानदार कवरेज के लिए/ साथ ही प्रस्तुत हैं यादगार लम्हों के कुछ चित्र/