Sunday, May 31, 2026

प्रीत की रीत

 प्रीत की रीत 

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पानी में घुले नमक के एहसास सा 

मुझ में घुल गए हो तुम 


नहीं नज़र आते कहीं भी 

हर पल मुझ में ही हो तुम 


पावस के पानी की बूंद 

 दुनिया से छुपा के 

अंतस में सहेज के 

रख लेती है सीप 


अजब  है यह प्रीत की रीत 

मितवा के मीत सी, खामोश गीत सी/


रजनी छाबड़ा 




Sunday, May 10, 2026

रजनी छाबड़ा की कविताएं