क्या आपको बहुत गुस्सा आ रहा है ?
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कभी कभी ऐसा होता है कि अपने किसी साथी, अधिकारी,सहयोगी या रिश्तेदार की जाने अनजाने कही कोई बात हमें चुभ जाती हैं/ हमारी भावनाएं आहत हो जाती हैं / कभी तो तेज़ गुस्सा आता है प्रतिक्रिया के रूप में और कभी मन बहुत आहात हो जाता है/ लगता है की आक्रोश में आकर, हम उस व्यक्ति को खूब खरी -खोटी सुना डालें और अपने मन का गुब्बार निकाल डालें/
परन्तु थोड़ा ठन्डे दिमाग से सोचिये कि क्या इस समस्या का एक मात्र यही समाधान है/ सब से पहले यह सोचिये कि इस स्थिति की शुरुआत कहीं आपकी ही वजह से ही तो नहीं हुई/
अगर आपको आत्म-विश्लेषण के बाद महसूस हो रहा हैं कि ग़लती या ज़्यादती सामने वाले की है; आप क्रोध पर नियंत्रण करने की कोशिश कीजिये/ अपनी मुठियाँ कस कर भींच लीजिये/ अब आप कहीं ऐसा तो नहीं सोचने लग गए कि मैं आपको उस व्यक्ति को पीटने की और मुक्केबाजी के सलाह देने वाली हूँ/ जी, नहीं; बिल्कुल भी नहीं/
आप कस कर मुठियाँ भींचिये और फिर सोचना शुरू कीजिये कि क्या उस व्यक्ति ने ज़िन्दगी में कभी भी आपकी कोई भलाई की थी; कोई सहायता की थी ; मानसिक राहत देने के लिए कोई कोशिश की थी , आपको असमंसजस की स्थिति से उबारने में कोई मदद की थी/ सोचते सोचते भिंची हुए मुठियाँ खुद धीरे धीरे खुलने लग जाएंगी , जब आपको उसकी कोई नेकी याद आ जाएगी और गुस्से पर स्वतः नियंत्रण हो जाएगा/
वैसे भी कम से कम एक ग़लती तो माफ़ कर ही देनी चाहिए; खुद भी मानसिक तनाव से थोड़ी राहत मिल जाती है/
71 वर्ष तक ज़िंदगी की धूप छाओं देखने के बाद , यह सलाह दे रही हूँ; आजमा कर देखिएगा/
('ज़िन्दगी की किताब से ' लघु कथा संग्रह का एक अंश/)
रजनी छाबड़ा
बहु भाषीय कवयित्री व् अनुवदिका
20 /३/2026


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