https://youtu.be/wiJF2oe2YLk?si=QGI7R_kdstjdTJFC
श्रीराम के दीवाने
https://youtu.be/wiJF2oe2YLk?si=QGI7R_kdstjdTJFC
आग़ोश में लिया है तुम्हें जब
आग़ोश में लिया है तुम्हें जब
सारी क़ायनात का नूर बाँहों में सिमट आया है
तुम हो हर सू और तेरे इश्क़ का साया है
ज़ुबां खामोश है, ख़ामोशी को जुबां मिलने लगी है
तेरे इश्क़ का अजब जादू छाया है
होश में भी तुम, बेख़ुदी में भी तुम
सिवा तेरे कुछ न नज़र आया है
तुम मेरे ख्वाबों की हद, मेरे प्यार की सरहद
कुछ इस के पार नहीं नज़र आया है/
रजनी छाबड़ा
24/6/2026
तुम मेरी राहत हो गए , तुम मेरी चाहत हो गए
तुम मेरी इबादत , तुम मेरी आयत हो गए
ज़मीन से फ़लक तलत, जहां भी नज़र जाए
हर तरफ, हर सू , तू ही तू नज़र आये
मंज़िल का अब कोई ठिकाना नहीं
कदम कहीं जाये, दिल कहीं और ले जाये
इश्क़ की राह पर चलते चलते
ज़माने के कितने दस्तूर ठुकराए
तुम हमराह, हम सफर क्या हुए
हम बैठे हैं खुद को भुलाये/
हे, विपदा तारिणी !
भटकी हूँ जीवन पथ पर
नहीं दिख रही मंज़िल
तुम्ही राह दिखलाओ
माँ बिन कहे जानती हैं
अपने भक्तों के कष्ट
सुलझाती हैं बिन कहे
उनकी समस्या विकट
हे, विंध्यवासिनी !
हे, विपदा तारिणी !
तुम शक्ति की प्रतीक
मेरी आस्था तुम्हीं में
तुम्हीं मेरी प्रीत
ज़िंदगी की झुलसाती धूप में
छावं दो अपने आँचल की
हर लो मेरा संताप
हे, विंध्यवासिनी !
हे, कष्ट निवारिणी !
हे, विंध्यवासिनी !
हे, विपदा तारिणी !
रजनी छाबड़ा
गीतकार
23 /9/2027
*********
अमृत जग में बाँट के, विष का प्याला पीने वाले
नीलकंठ , हे, नीलकंठ !
भक्तों की खुशियों में , खुश हो के जीने वाले
नीलकंठ , हे, नीलकंठ !
जटाओं में पावन गंगा विराजे
कंठ में सर्प का हार साजे