Thursday, April 30, 2026

दुनिया का दस्तूर यही है

 दुनिया का दस्तूर यही है 

******************

या, ख़ुदा !

दीन दुनिया के  

रस्मों रिवाज़ 

क्यों प्यार करने वालो से 

रहते नाराज़ 


खुशनसीब हैं परिंदे 

जिन्हें नहीं कोई बंदिशे 

जब चाहा पंख पसारे 

भर ली उन्मुक्त उड़ान 

कोई उनसे नहीं पूछता सवाल 

किसे के साथ विचर रहे थे तुम दिन भर 

किस पेड़ पर बिताई तुमने सारी रात 


इंसानो  की तो ज़िन्दगी ही रीत जाती है 

दुनियावी दस्तूरों की बेड़ियाँ के बंधन में 

दस्तूर हावी हो जाते हैं उन्मुक्त जीवन पर 


रजनी छाबड़ा 



ज़िन्दगी यूं तो बसर नहीं होगी

  ज़िन्दगी यूं तो बसर नहीं होगी 

***********************

ज़िन्दगी यूं तो बसर नहीं होगी 

तुम तन्हा और मैं तन्हा 


जंगल की  दो शाखों सा 

जो कभी मिल के भी नहीं मिलते 


अधूरी हैं तमन्ना, अधूरी मिलन की आरज़ू 

फ़ूल अब खिल कर भी नहीं खिलते 


तुम्हारे बिना दिल यूं रहे बेक़रार 

दिन उगते ही, शाम ढलने का रहे इंतज़ार 


मन की खुली सीप में गिरी जो बूँद 

प्यार के सच्चे  मोती सी संजोयी 


क्या अब शूल बन रह जाएगी 

ता-उम्र हमें तड़पाएगी 


दुनिया क्यों ही सितम करती रहेगी 

और आशिकों पर क़यामत आएगी 


रजनी छाबड़ा 

Sunday, April 26, 2026

BIKANA RATAN AWARD


BIKANA RATAN AWARD TO REPUTED MUSIC DIRECTOR AND TO ME FOR CONTRIBUTION TO MUSIC AND LITERATURE ON BIKANER FOUNDATION DAY, 19/4/2026



Saturday, April 25, 2026

गर तुम साथ होते

गर तुम साथ होते

*************

 यह हसरत ही रही कि ज़िन्दगी के राहों पे साथ तेरा होता 

पार कर जाते हँसते हुए सहरा दर सहरा , गर हाथों में हाथ तेरा होता 


मुझे मिली हैं नसीब में जो स्याह दर स्याह रातें , गर तुम साथ होते 

स्याह रातों के बाद उजला सवेरा होता/


ज़िंदगी हैं मेरी , तेरी छोड़ी हुई अधूरी क़िताब 

गर तुम साथ होते, मुक़्क़मल यह अफसाना मेरा होता/


रजनी छाबड़ा 


मन के बाजार में

 टूट कर जुड़ भी जाएँ, तो दरार दिखती है 

मन के बाजार में फिर नहीं वो शै बिकती है 


यूँ तो चाँद की चाँदनी बिखरती है सारे जहां पर 

ग्रहण लगे चाँद से चांदनी नहीं रिसती है 


दुनिया के लिए वही सुबह, वही है शब 

बाद तेरे मेरी हर सुबह शब् जैसी, हर शबे गम सिसकती है 


धुँधला रहे तेरे नक़्श ए पाँ, वक़्त की रेत में 

अब रास्ता ही रास्ता है , मंज़िल नहीं दिखती है/


रजनी छाबड़ा 

Friday, April 24, 2026

नम हवाएं

नम हवाएं 

*******

हवाओं में नमी है 

 मेरी नम आँखों जैसी 

क्या उन पर भी 

 किसी की जुदाई का 

असर छाया है ?



haiku 2

Hawaon mein name hai, meri nm.aankhon. jaisee

Kya un pr kisee zudai ka asar chhaya hai

महकी फ़िज़ाएं

 

महकी फ़िज़ाएं 

***********

जुबां शीरीं हो गयी है 

आँखों में ख़ुमार उतर आया है 


लरज़ते लबों पे 

तुम्हारा नाम उतर आया है 


शबनमी क़तरे मिले ताज़ा कली से 

अठखेलियों का मौसम आया है 


महकी लगती हैं फ़िज़ाएं 

बहार पर निख़ार उतर आया है 


तुम भी महसूस कर रहे हो शिद्दत से 

या फिर मुझ ही पे खुमार उतर आया है/


रजनी छाबड़ा 

Haiku 1


Jubban sheeren ho gayi  hai, aankhon mein khumaar uttar aaya hai

larjate hothon pr tumhara naam uttar आया है 

Chnd shabnamee qatre gale milee taza kali se, athkheliyon ka mousam aaya hai

Mahkee lagtee hai fizayen, Bahar pe nikhar uttar aaya hai

Tum bhee mahsus kr rho shiddat se

Ya phir mujh pr hee khumaar uttar aaya hai

Rajni Chhabra