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Expression
Saturday, September 19, 2026
Friday, September 18, 2026
याद कीजिये वो दिन
याद कीजिये वो दिन
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याद कीजिये वो दिन
जज़्बात उभरा करते थे
कल-कल करते निर्झर सी
रवानी लिए
कलम -कागज़ उठाया
उढेल दिए जज़्बात
सरलता से लिख डाली
मन की हर बात
मुँह -जबानी भी
शब्दों को मिलती थी रवानी
पीढ़ी दर पीढ़ी
सुनाए जाते थे
वीर गाथाएँ और कहानी
इंसान के दिलऔर दिमाग के बीच
नहीं था कोई कंप्यूटर
थिरकती उँगलियों से
थिरकते जज़्बात
लिख दिए जाते थे
बरबस कोरे कागज़ पर
कंप्यूटर के चलन ने
बदल दिया लिखने का सलीका
किताब और पाठक का रिश्ता
उँगलियों में लग रहे जंग
और सूखने लगी स्याही
लेखनी कागज़ के संग
रह गयी अनब्याही /
Saturday, September 12, 2026
Saturday, September 5, 2026
Wednesday, August 26, 2026
समंदर कब किसी की प्यास बुझाता है
समंदर कब किसी की प्यास बुझाता है
यह हुनर तो दरिया को ही आता ही
ताड़ का पेड़ कब छाया देता है किसी को
छाया तो घना पीपल ही पहुंचाता है
तेज़ रफ़्तार हवाएं बस जड़ से उखाड़ देती हैं
सुकून तो मंद बयार का झोंका ही लाता है
ऊंची मीनारें सुकून देती हैं नज़रों को
बसेरे के काम तो आशियाना ही आता है/
रजनी छाबड़ा
बहु भाषीय कवयित्री व् गीतकार
26/8 /2026

