तुम तो सिमट कर रह गए
इक तस्वीर में
कैसे समेटूं मैं
अपने बिख़री तक़दीर को
धड़कनें अब
सदा नहीं देती
तेरी तस्वीर से
और अनजान हूँ मैं
अपनी धड़कनों की
तक़दीर से
(पुरानी डायरी से )
रजनी छाबड़ा
11 /3 /1989