Saturday, April 25, 2026

गर तुम साथ होते

 यह हसरत ही रही कि ज़िन्दगी के राहों पे साथ तेरा होता 

पार कर जाते हँसते हुए सहरा दर सहरा , गर हाथों में हाथ तेरा होता 


मुझे मिली हैं नसीब में जो स्याह दर स्याह रातें , गर तुम साथ होते 

स्याह रातों के बाद उजला सवेरा होआ 


ज़िंदगी हैं मेरी , तेरी छोड़ी हुई अधूरी क़िताब 

गर तुम साथ होते, मुक़्क़मल यह अफसाना मेरा होता/


रजनी छाबड़ा 


मन के बाजार में

 टूट कर जुड़ भी जाएँ, तो दरार दिखती है 

मन के बाजार में फिर नहीं वो शै बिकती है 


यूँ तो चाँद की चाँदनी बिखरती है सारे जहां पर 

ग्रहण लगे चाँद से चांदनी नहीं रिसती है 


दुनिया के लिए वही सुबह, वही है शब 

बाद तेरे मेरी हर सुबह शब् जैसी, हर शबे गम सिसकती है 


धुँधला रहे तेरे नक़्श ए पाँ, वक़्त की रेत में 

अब रास्ता ही रास्ता है , मंज़िल नहीं दिखती है/


रजनी छाबड़ा