यह हसरत ही रही कि ज़िन्दगी के राहों पे साथ तेरा होता
पार कर जाते हँसते हुए सहरा दर सहरा , गर हाथों में हाथ तेरा होता
मुझे मिली हैं नसीब में जो स्याह दर स्याह रातें , गर तुम साथ होते
स्याह रातों के बाद उजला सवेरा होआ
ज़िंदगी हैं मेरी , तेरी छोड़ी हुई अधूरी क़िताब
गर तुम साथ होते, मुक़्क़मल यह अफसाना मेरा होता/
रजनी छाबड़ा