Friday, May 1, 2026

युगों युगों तक


युगों युगों तक 

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 ज़िंदगी की किसी अनजानी राहगुज़र पर 

मिल जाये जब यकायक मनचाहा हमसफर 

कहता हैं मन, कभी थमे न यह सफर 

एक एक पल , बन जाये एक युग का 

और सफर चलता रहा युग-युगान्तर /


(पुरानी डायरी के पन्नों से)

रजनी छाबड़ा  

प्यार इक तरफ़ा नहीं है


 सुर सजते हैं जब 

मन के तार बजते हैं 


लहरें अठखेलियाँ करती 

सागर के साथ  

सागर को भी देती विस्तार 

प्यार इक तरफ़ा नहीं है 


पावस की बूँद की आस 

चातक सहेजे रखता प्यास 

चाहे कितनी भी हो दुश्वारियां 

ऐसी ही सच्चे आशिकों की यारियां/


रजनी छाबड़ा 

बहुभाषीय कवयित्री व् अनुवादिका