Monday, February 23, 2026

भीड़ भरी सड़क और वृद्धा

 भीड़ भरी सड़क और वृद्धा 

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स्कूल की छुट्टी की घंटी अभी अभी बजी थी/ बालक उछलते  कूदते  मुख्य द्वार से  बाहर आये/ पैदल जाने वाले बालक , सड़क के किनारे खड़े, ट्रैफिक कम होने की  प्रतीक्षा का रहे थे/ सभी चुहलबाज़ी में व्यस्त थे/ तभी उनमें से एक बालक  का ध्यान, एक वृद्धा की ओर गया, जो हिचकिचाती हुई सड़क पर खड़ी थी और अकेले सड़क पार करने में हिचकिचा रही थी/ शायद प्रतीक्षा कर  रही थी कि कोई उसका हाथ थाम कर सड़क पार करने में उसकी सहायता कर  दे/

वह बालक तुरंत उसकी ओर गया, उसका हाथ थामा और सड़क पार करने में उसकी सहायता की/ वृद्धा ने उसे मुस्कुराते हुए आशीष दी/ 

उसके साथियों ने उस से पूछा, " तुम उसकी मदद क्यों कर रहे थे ? क्या वह तुम्हारी दादी लगती है? बालक ने तुरंत उत्तर दिया, "वह मेरी दादी नहीं है, परन्तु किसी न किसी की दादी माँ तो अवश्य है , जोकि इस समय यहां  किसी कारणवश उपस्थित नहीं है/ इसलिए, यह मेरा कर्तव्य बनता है कि मैं उनकी मदद करूँ।"

@रजनी छाबड़ा 

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