भीड़ भरी सड़क और वृद्धा
**********************
स्कूल की छुट्टी की घंटी अभी अभी बजी थी/ बालक उछलते कूदते मुख्य द्वार से बाहर आये/ पैदल जाने वाले बालक , सड़क के किनारे खड़े, ट्रैफिक कम होने की प्रतीक्षा का रहे थे/ सभी चुहलबाज़ी में व्यस्त थे/ तभी उनमें से एक बालक का ध्यान, एक वृद्धा की ओर गया, जो हिचकिचाती हुई सड़क पर खड़ी थी और अकेले सड़क पार करने में हिचकिचा रही थी/ शायद प्रतीक्षा कर रही थी कि कोई उसका हाथ थाम कर सड़क पार करने में उसकी सहायता कर दे/
वह बालक तुरंत उसकी ओर गया, उसका हाथ थामा और सड़क पार करने में उसकी सहायता की/ वृद्धा ने उसे मुस्कुराते हुए आशीष दी/
उसके साथियों ने उस से पूछा, " तुम उसकी मदद क्यों कर रहे थे ? क्या वह तुम्हारी दादी लगती है? बालक ने तुरंत उत्तर दिया, "वह मेरी दादी नहीं है, परन्तु किसी न किसी की दादी माँ तो अवश्य है , जोकि इस समय यहां किसी कारणवश उपस्थित नहीं है/ इसलिए, यह मेरा कर्तव्य बनता है कि मैं उनकी मदद करूँ।"
@रजनी छाबड़ा
No comments:
Post a Comment