Monday, February 23, 2026

आप न मरिये, स्वर्ग न जाईये :भाग 1

आप न मरिये, स्वर्ग न जाईये : भाग 1

******************************

 जन जीवन से जुड़ी एक छोटी सी घटना आपके साथ सांझा कर रही हूँ, इस उम्मीद के साथ कि यह आपकी सोच को एक सार्थक दिशा देगी/

एक गांव में एक मेहनती किसान पूरे मनोयोग से अपना सारा दिन अपने खेतों में खेती-बाड़ी करते हुए बिता देता/ कड़कती धूप, झुलसाती गर्मी , बारिश, ठिठुराती सर्दी, इस सभी मौसमों को समभाव से झेलता, अपने काम में लगा रहता/  जब फसल पकती, रात रात भर खेत में चारपाई डाल के सोता, फसल की निगरानी के लिए/ अलाव भी जला लेता, ताकि जानवर भी खेत को कोई नुक्सान न पहुंचा सके और वह ख़ुद भी सुरक्षित रहे/

जैसे ही फसल की कटाई का काम समाप्त होगा और वह दो पल के लिए राहत की सांस लेता, ज़मींदार आ धमकता, अपने क़र्ज़ की वसूली के लिए / खेत बरसों से ज़मींदार के पास गिरवी थे/ आधी से अधिक फसल वो वसूल के लेता और बेचारा किसान मन मसोस के रह जाता/

एक दिन, बहुत दुखी मन से, वह ईश्वर के आगे गिड़गिड़ाया/ विनती की कि उसे अगले वर्ष ख़ूब लहलहाती फसल दे/ मेहनत करते करते वह उक्त चुका था / शारीरिक श्रम की शक्ति भी अब पहले जैसी नहीं थी/ ईश्वर ने उसको लहलहाती फ़सल का वरदान दे दिया/

किसान आश्वस्त हो गया और उसने सोचा कि  अब कुछ आराम से जीवन  बिता लूं / पहले जैसे मेहनत की क्या ज़रूरत है/ ईश्वर ने वादा किया है तो निभाएगा ही/

उचित समय आने पर फसल तैय्यार हो चुकी थी/ लहलहाती फसल देख का किसान मन ही मन बहुत खुश था कि अब तो ज़मींदार का क़र्ज़ भी उतार लेगा और उसके बाद अपनी गृहस्थी के लिए भी कुछ अनाज बच जायेगा; आराम से गुज़र -बसर हो जाएगी/

परन्तु, जैसे ही उसने फसल काटनी शुरू की, उसके आश्चर्य का ठिकाना न रहा/ वह सदमे में आ गया/ गेहूं की लहलहाती बालियों में तो कुछ और ही राज़ छुपा था/ जैसे ही छटनी शुरू की, किसान यह देख कर सकते में आ गया कि गेहूँ की बालियाँ अंदर से खोखली थी/ उनमें गेहूँ का एक भी दाना न था/


कृपया शेष कहानी के लिए देखिये आप न मरिये, स्वर्ग न जाईये :भाग 2 

नोट:  मित्रों ,मैंने हाल ही में, जीवन की सत्य घटनाओं पर आधारित लघु-कथाएं कलमबद्ध करने का प्रयास किया है/ इन में से कुछ जगबीती हैं और कुछ आपबीती/ कुछ और लघु-कथाएं भी आपके साथ धीरे धीरे सांझा करूंगी/ आपकी प्रतिक्रिया मुझे सम्बल देगी और सुधार के लिए दिशा भी/ ब्लॉग के कमेंट-बॉक्स में आपकी प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा रहेगी/

रजनी छाबड़ा 


 


2 comments: