Friday, February 6, 2026

उन्मुक्त उड़ान




उन्मुक्त उड़ान 

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युगों से 

पिंजरे में क़ैद 

पंछियों ने 

मुक्ति की योजना बनाई 


बहलिए से विनती की 

पिंजरे से मुक्त करने की 

नभ का विशाल विस्तार 

उन्हें मानो उकसा रहा था 

बेड़ियाँ तोड़ने के लिए 


मन ही मन भयभीत थी 

विस्तृत आकाश में 

उन्मुक्त उड़ान लेने से पहले 

जहाँ चीलें और गिद्ध भी 

अपने बड़े बड़े पंख पसारे 

नुकीली चोंच, तीखे पंजों 

और शिकार के लिए 

पैनी दृष्टि के साथ 

उन्मुक्त उड़ते रहते हैं 

कहीं उन पर 

जानलेवा हमला न कर दें 


बहलिए ने उन्हें 

चेताने की कोशिश की 

पर ज़िद पर उतारू 

चिड़ियों के समक्ष 

झुकना ही पड़ा उसे 


अलग थलग उड़ने की बजाय 

वे उड़ी झुंड में 

उनका यह चातुर्य देख कर 

अब चीलें भी 

सकते में आ गयी 


दृढ इच्छा शक्ति से भरी 

एक सुगठित सेना 

जो परवाह नहीं करती 

विषम परिस्थितियों की  

डटी रहती है चट्टान सरीखी 

उस सेना पर आक्रमण करना 

 कभी भी आसान नहीं होता 


अब बहेलियों ने भी 

बदल डाली है अपनी सोच 

ख़ुशियों से भरपूर 

फड़फड़ाते पँखों को देख 

और अपेक्षाकृत पसंद करते है 

पंछी यूं ही आनंद लेते रहें 

उन्मुक्त उड़ान का /


रजनी छाबड़ा 

बहु भाषीय कवयित्री व् अनुवादिका