Monday, November 10, 2025

शब्द कोश रीत जाता है

 शब्द कोश  रीत जाता है 

******************

कैसे गुणगान करूँ मैं 

तुम्हारे अपरिमित सौंदर्य का 

तुम्हारे पावन, सुरमई आलोक का 

तुम्हारी मनभावन छवि 

तुम्हारे सौम्य स्वरूप का 


ओस की बूंदे, गुलाबी पंखुरियों से तुम्हारे लबों पर 

नृत्य करती, थरथराती 

बरखा की बूंदे , तुम्हारे हरित परिधान को 

सजाती -सँवारती, निखारती  

मेघ राशि तुम्हारे घने काले केशों को धोती 

मंद- मंद बयार 

तुम्हारे गालों  को सहलाती 

अठखेलियाँ करती तुम्हारे संग


तुम्हारे शोख नयनों को 

और भी कजरारा करते 

मदमस्त बादल 

उनमें अपना अक़्स छोड़ कर 

इठलाती , बल खाती नदियाँ 

अपनी रवानगी से , चार चाँद लगातीं 

तुम्हारी मंत्र -मुग्ध करती चाल में 


दिन में ,सूर्य अपनी सुनहरी रंगत से 

कर  देता तुम्हारी काया सोनाली 

और सांझ ढले 

अपनी सिंदूरी किरणों से 

आतुर रहता 

तुम्हारी मांग भरने के लिए 

धीमे क़दमों  से आती रात के साथ 

चाँद, तारो की बारात लिए आता 

तुम्हें प्रेम निमंत्रण देने 


तुम प्रकृति की साम्राज्ञी 

मैं  शब्दों का विनीत पुजारी 

प्रयास रत हूँ , तुम्हारी छवि 

शब्दों में उकेरने के लिए 

परन्तु ,

 हे,वनदेवी!

मेरी आँखों में क़ैद 

मेरी मन की अथाह गहराईयों में उतरे 

इस आलौकिक स्वरूप को 

शब्दों में पिरोने के प्रयास में 

हर बार रह जाता हैं कुछ अनकहा 

शब्द-कोश  रीत जाता है/


@रजनी छाबड़ा 

10 /11/2025 














Thursday, October 30, 2025

फ़ैसला आप कीजिये

 फ़ैसला आप कीजिये 

एक बरसों पुरानी कहानी आपके साथ सांझा कर रही हूँ; परन्तु प्रासंगकिता आज भी है/ 

एक गांव में एक कुम्हार बरसों से अपना पुश्तैनी धंधा कर  रहा था / वह माटी को घड़ता था और चिलम का रूप देता था/ गांव से राहगीर जब गुज़रते , उसके घर के बाहर लगे, एक विशाल वृक्ष की छाया में कुछ पल सुस्ताने के लिए रुक जाते/ चिलम भरते और हुक़्क़ा गुड़गुड़ाते / कुछ कश  लेते और तरोताज़ा महसूस करते हुए, अपनी राह पकड़ लेते/ 

एक साधु ने कुछ दिनों के लिए गांव में डेरा डाल लिया/ वह अक़्सर देखता की राहगीर आते हैं, पेड़ की शीतल छाया में सुस्ताते है, कुम्हार से चिलम लेते हैं , चिलम भरने के बाद, हुक्के से कुछ कश लेते है और सुकून महसूस करते हुए , आगे रवाना हो जाते हैं/ 

साधु एक दिन उस कुम्हार के पास गया और उस से पूछा तुम मिट्टी से चिलम ही क्यों बनाते हो, कुछ और क्यों नहीं / कुम्हार ने विनीत भाव से उत्तर दिया, " मैंने तो बचपन से ही अपने बाप-दादा को चिलम बनाते हुए ही देखा है और मैं इसी पुश्तैनी धंधे को आगे बढ़ा , अपनी रोज़ी रोटी का जुगाड़ कर  रहा हूँ/ राहगीर भी चिलम से कश लगाकर अपनी थकावट मिटा लेते हैं ,तो मुझे अच्छा लगता है/

साधु ने कहा, "अगर तुम मेरी सलाह मानो तो चिलम की बजाय, सुराही  बनाना शुरू कर दो/ राहगीर जब पेड़ की छाया में सुस्ताने रुकें , तो उन्हें सुराही बेचो/ शीतल जल से प्यास बुझाकर उन्हें संतुष्टि  मिलेगी/ और तुम्हारी आजीविका का साधन भी हो जाएगा/''

कुम्हार से साधु की सलाह मानते हुए, सुराही बनाना शुरू कर दिया/ बिक्री भी अच्छी ख़ासी होने लगी/

एक रात कुम्हार की नींद खुली, तो उसने अपने बाड़े से किसी के खिलखिलाने की आवाज़ सुनी / उत्सुकता वश उस ओर गया तो देखा कि सुराही खिलखिला कर  हँस रही है/ कुम्हार से पूछा ," तुम किस बात पर इतनी हँसी आ रही है?'

सुराही बोली," मैं अपने इस रूप से बहुत खुश हूँ/ मेरा तन मन शीतल है/ मिट्टी तो मैं वहीँ हूँ; परन्तु तुम पहले मुझे चिलम का आकार देते थे / मेरा उपयोग करने वाले इसमें आग भरते थे/ मेरा सीना तो सुलगता ही था, चिलम पीने वालों के सीने में भी जलन मचती थी/ अब मुझ में शीतल जल भरा जाता है; मेरे सीने में तो ठंडक है ही, इस शीतल जल का उपभोग करने वाले  को भी शीतलता मिलती है/ इस नए रूप के लिए , मैं तुम्हारी आभारी हूँ/'

कुम्हार भी इस उत्तर से बहुत खुश हुआ और साधु का आभार माना उचित मार्गदर्शन के लिए/

अब आप ही फैसला कीजिए/ कच्ची माटी को क्या रूप देने में सार्थकता है/

@ रजनी छाबड़ा 

30 /10 /2025 




Friday, September 26, 2025

Bio data

 

 रजनी छाबड़ा (जुलाई 3, 1955)

पत्नी : स्व. श्री सुभाष चंद्र छाबड़ा

राष्ट्रीयता : भारतीय

जन्मस्थान : देहली

सेवानिवृत व्याख्याता (अंग्रेज़ी)बहुभाषीय कवयित्री व् अनुवादिकाब्लॉगर, समीक्षक, Ruminations, Glimpses (U G C  Journals) की सम्पादकीय टीम सदस्य वर्ल्ड यूनियन ऑफ़ पोएट्स  की इंटरनेशनल डायरेक्टर 20ग्लोबल एम्बेसडर फॉर ह्यूमन राइट्स एंड पीस (I H R A C),  स्टार एम्बेसडर ऑफ़ वर्ल्ड पोइट्री, सी इ. ओ व् सस्थापक www.numeropath. com 

 प्रकाशित पुस्तकें : 4  हिंदी काव्य संग्रह 'होने से न होने तक', 'पिघलते हिमखंड', 'आस की कूंची से', 'बात सिर्फ इतनी सी '  

इंग्लिश पोइट्री: Mortgaged, Maiden Step, A Pinch of Salt

अंकशास्त्र और नामांक -शास्त्र पर 13 पुस्तकें 

अनुदित पुस्तकें : Aspirations,  Initiation, A Night in Sunlight, Swayamprabha, Accursed, Haven to  Soul, A Handful of Hope. Merging with the Divine,  On the Canvas of Life हिंदी से, Reveries पंजाबी से व् Purnmidam, Fathoming Thy Heart, Vent Your Voice, Language Fused in Blood, The Sun on Paper, In the Art Gallery of My Heart, Across the Border, Sky is the Limit,  Let the Birds Chirp राजस्थानी से,  Faces without Traces नेपाली से  इंग्लिश लक्ष्य भाषा में अनूदित

Lustus महाकाव्य इंग्लिश से हिंदी में अनूदित 

मेरे २ हिंदी काव्य संग्रह 'होने से न होने तकव् 'पिघलते हिमखंडमैथिली और पंजाबी में व् अंग्रेज़ी काव्य संग्रह Mortgaged बांग्ला और राजस्थानी में अनुदित व् चुनिन्दा कविताएँ 12 क्षेत्रीय भाषाओँ में अनुदित 

स्थानीय, राष्ट्रीय व् अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर काव्य सम्मेलनों में भागीदारी व् 9  अंतर्राष्ट्रीय काव्य संग्रहों में रचनाएँ सम्मिलित , 1991 से 2010 तक, आकाशवाणी, बीकानेर से निरंतर काव्य पाठ प्रसारण 

राष्ट्रीय व् अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कवि सम्मेलनों में भागीदारी 

डिजिटल साहित्य में निरंतर योगदान , पोयम हन्टर्स डॉट.कॉम पर अनेकानेक कविताओं के वीडियो , किंडल बुक पब्लिशिंग से 52  इ बुक्स प्रकाशित

यूट्यूब चैनल : therajni 56 
ई-मेल           : rajni. numerologist @gmail.com 

Thursday, June 26, 2025

सशक्त


सशक्त 

******

मधुमखियाँ संयुक्त प्रयास से 

बनाती शहद का छत्ता 


क़तरा क़तरा  

प्रवाहित होता 

पिघलते हिमखंड से  

और नदी का रूप  लेता 


नदियाँ समाती जाती 

सागर में 

और सागर बन जाता 

असीम, अथाह 


जन मत का सागर भी 

कुछ ऐसा ही है 

एकजुटता से 

बनता सशक्त /

रजनी छाबड़ा 


Monday, February 10, 2025

सर्ग १ ज्ञान: खतरे का कार्यक्षेत्र COMPILED PAGE 1 to 13 COMPLETE CANTO 1 Re-Edited

A DATE WITH ETERNITY


 A DATE WITH ETERNITY


LUSTUS is a lucky chap. He was brought down from celestial spheres into Bengal by way of its translation into Bengali.


It has seen the beautiful landscape of Iran also   after its Persian translation by Dr Roghayeh Farsi, Professor of English, Univ of Neyshabur Iran.


Now, I am thankful to Dr Rajni Chhabra, noted poet, translator and Numerologist  who has decided to create it's Hindi Avataar. Trans- creating Lustus into Hindi is a great service to the cause of Indian literature for which I appreciate Dr Rajni Chhabra because translating an epic like Lustus is really a challenging  job with its Neo-Mythology and technical exoerim jientation.


I congratulate Dr Rajni Chhabra and look forward to its publication in Hindi