Sunday, April 5, 2026

रैगिंग

रैगिंग 

मैं अपने कॉलेज के दिनों की एक घटना आपको बताना चाहूंगी, जो  सन 1970 में घटित हुई/ ग्रेजुएशन के लिए , Govt College for Women , श्रीनगर में दाख़िला लिया था/ काश्मीरी भाषा का ज्ञान बिल्कुल भी नहीं था/ अभी किसी से भी कोई मित्रता भी नहीं हुई  थी/

उन दिनों जलशुद्धीकरण यंत्र और वाटर कूलर का चलन नहीं था/ अपनी प्यास बुझाने के लिए, नल तक जाना पड़ता था/ नल खोलिये, हथेली की ओक बनाईये और नल से सीधे ही पानी पी लीजिये/ कई बार तो नल के आगे लम्बी क़तार लगी  रहती और नल के आस पास छात्राओं  के झुंड दिखाई देते/ रैगिंग अपनी चरम सीमा पर थी/ 

जब में नल के पास अपनी बारी की प्रतीक्षा में खड़ी थी, कुछ वरिष्ठ छात्राओं ने मुझे पुकारा और मुझे  आदेश दिया कि पास में जो एक झाड़ी उगी हुए थी, उस के कुछ पत्ते तोड़ कर उनके लिए लाऊँ/ जिस क्षण मैंने पत्ते तोड़े , मेरे हाथों और बाजुओं  में बुरी तरह जलन शुरू हो  गयी, जोकि मेरे लिए बिल्कुल असहनीय थी / मैं बहुत बैचैन हो रही थी/ हाथ धोने से भी मुझे कोई राहत नहीं मिली/ इस सा समूची घटना की सब से बुरी बात यह थी कि वे निर्दयी छात्राएं मेरी इस दुर्दशा पर ठहाके लगा रही थी/ मेरी आँखों से आंसू बह निकले/

इसी समय के दौरान, कुछ और छात्रों का झुंड, उसी स्थल के करीब  आया/ उन्हें मेरी यह दुर्दशा बर्दाश्त नहीं हुई / उन्होंने मुझे तुरंत निर्देश दिया कि उस जहरीली झाड़ी के पास हे जो एक और झाड़ी उगी हुई है, मैं तुरंत उसके कुछ पत्ते तोड़ कर लाऊँ और प्रभावित अंगों पर उन्हें  रगड़ दूँ/ उन्होंने मुझे बताया कि उस झाड़ी के पत्तों में औषधीय गुण है और वे इस ज़हरीले असर को ख़त्म कर  देंगे/ मैंने उनकी बात का अनुकरण किया और यह मेरे लिए बहुत सुखःद आश्चर्य रहा कि मुझे अपनी परेशानी से तुरंत राहत मिल गयी /

मैं उन दयालु छात्राओं को हृदय तल से आभार प्रकट किया/

उस दिन से मेरे मन में एक बात गहरी पैठ गयी  कि जहां कहीं भी कोई समस्या होती है, उसका  हल भी कहीं आस  पास ही होता है/ इसके अलावा, अगर दुनिया में कुछ दुष्ट प्रवृति के लोग है, जिन्हे आपको परेशान करने में  ही आनंद मिलता है; तब प्रभु ने कुछ नेक दिल इंसान भी बनाये है , जो आपकी सहायता के लिए तत्पर रहते है/ उन बुरे लोगों को भूलने की कोशिश कीजिये और दयालु लोगों की अच्छाई को हमेशा याद रखिये/


'ज़िन्दगी की किताब से' मेरे  कहानी संग्रह से उद्धृत एक कहानी  

रजनी छाबड़ा 

बहु-भाषीय कवयित्री व् अनुवादिका 

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