Friday, March 27, 2026

तपते पत्थरों पर जीवन से भेंट

 







तपते पत्थरों पर ज़िंदगी से मुलाक़ात

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शहर के नन्हे परिंदे
न घरौंदा
न ही शज़र का
न अम्मी का साया
ये कैसा दौर आया
ज़मींन पर ही आशियाना बनाया

रजनी छाबड़ा



तपते पत्थरों पर जीवन से भेंट


शहर के दो नन्हे पाखी
न नीड़
न तरु
और न ही
माँ का साया
यह कैसा दौर आया
सूने फर्श पर ही
बसेरा बनाया

उर्दू और हिंदी में मेरी रचना

रजनी छाबड़ा 

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