प्रीत की रीत
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पानी में घुले नमक के एहसास सा
मुझ में घुल गए हो तुम
नहीं नज़र आते कहीं भी
हर पल मुझ में ही हो तुम
पावस के पानी की बूंद
दुनिया से छुपा के
अंतस में सहेज के
रख लेती है सीप
अजब है यह प्रीत की रीत
मितवा के मीत सी, खामोश गीत सी/
रजनी छाबड़ा
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