समंदर कब किसी की प्यास बुझाता है
इस काम तो दरिया ही आता ही
ताड़ का पेड़ कब छाया देता है किसी को
छाया तो घना पीपल ही पहुंचाता है
तेज़ रफ़्तार हवाएं बस जड़ से उखाड़ देती हैं
सुकून तो मंद बयार का झोंका ही लाता है
ऊंची मीनारें सुकून देती हैं नज़रों को
बसेरे के काम तो आशियाना ही आता है/
रजनी छाबड़ा
बहु भाषीय कवयित्री व् गीतकार
26/8 /2026
No comments:
Post a Comment