एक खवाब
बेनूर आँख के लिए
एक आह
खामोश लब के लिए
एक पैबंद
चाक जिगर
सीने के लिए
काफी हैं
इतने सामान
मेरे
जीने
के लिए
Tuesday, October 13, 2009
Monday, October 12, 2009
धुंध
उदासियों की परत दर परत
धुंध नहीं
जो छंट जायेगी
इस कदर मन मैं
गहरी पैन्ठी हैं
अब इस जान के
साथ ही जायेगी
धुंध नहीं
जो छंट जायेगी
इस कदर मन मैं
गहरी पैन्ठी हैं
अब इस जान के
साथ ही जायेगी
Friday, October 9, 2009
Thursday, October 8, 2009
कल,आज और कल
आने वाला कल
कभी नहीं आता
क्योंकि कल
आते ही ,है
आज बन जता
फिर क्यों न हम
आज के पल पल को
सहेजे,समेटे और
संवारे जाएँ
ताकि
आज के साथ साथ
बिता हुआ कल भी
हमें पूर्णता का
एहसास दिला जाए
कभी नहीं आता
क्योंकि कल
आते ही ,है
आज बन जता
फिर क्यों न हम
आज के पल पल को
सहेजे,समेटे और
संवारे जाएँ
ताकि
आज के साथ साथ
बिता हुआ कल भी
हमें पूर्णता का
एहसास दिला जाए
Wednesday, October 7, 2009
Tuesday, October 6, 2009
मन के बंद दरवाजे
इस से पहले की
अधूरेपन की कसक
तुम्हे चूर चूर कर दे
ता उमर हंसने
से मजबूर कर दे
खोल दो
मन के बंद दरवाजे
और घुटन को
कर लो दूर
दर्द हर दिल
मैं बस्ता है
दर्द से सभी का
पुश्तेनी रिश्ता है
कुछ उनकी सुनो
कुछ अपनी कहो
दर्द को सब
मिल जुल
कर सेहो
इस से पहले की दर्द
रिस रिस बन जाए नासूर
लगाकर हमदर्दी का मरहम
करो दर्द को कोसों दूर
बाँट लो सुख दुःख को
मन को,जीवन को
अमृत से
कर लो भरपूर
खोल लो मन के
बंद दरवाजे
और घुटन को
कर लो दूर
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