Friday, November 6, 2009

लोकतंत्र


लोरी---एक राजस्थानी लघुकथा
फुटपाथ पर जीवन बितानेवाली एक गरीब औरत,भूखे बालक को गोद में लिए बैठी थी.भूखे बालक की हालत बिगड़ती जा रही थी.
थोड़ी दूरी पर,बरसों से जनता को सुंदर,सुंदर,मीठे मीठे सपने दिखने वाले नेताजी भाषण बाँट रहे थे.
भाषण के बीच में बालक रो दिया.माँ ने कह,"चुप,सुन,नेताजी कितनी मीठी लोरी सुना रहें हैं." नेताजी कह रहे थे,"मैं देश से गरीबी-महंगाई मिटा दूंगा.देश फिर से सोने की चिड़िया बन जायेगा,घी दूध की नदियाँ बहेंगी
.कोई भूखा नहीं मरेगा...."
यह सुन कर खुश होती हुई माँ ने सुख समाचार सुनाने के लिए,बालक को झकझोरा.बालक भूख से मर चुका था.
लेखक:श्री लक्ष्मीनारायण रंगा
अनुवाद :रजनी छाबड़ा 





लोकतंत्र

एक निर्वाचित सदस्य ने दूसरे से पूछा,"तुम्हे कितने वोट मिले? दूसरे ने फट से जवाब दिया,"मुझे वोट मिलते नहीं, मैं तो वोट ले लेता हूँ, वोट मांगना मैं हराम समझता हूँ"
यह कहता कहता, वह हँस रहा था.मालूम नहीं किस पर.वोटरों पर ?चुनाव पर? लोकतंत्र पर ?
राजस्थानी लोक कथा
लेखक:श्री लक्ष्मी नारायण रंगा
अनुवादिका :रजनी छाबड़ा .

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कैसा विचलन

कैसा विचलन
विस्तृत धरा का
हर एक कोना
कभी न कभी
प्रस्फुटित होना
कंटीली राहों से
कैसा विचलन
सुनते हैं
काँटों में भी है
फूल खिलने का चलन


रजनी छाबड़ा

Thursday, November 5, 2009

LORI : Rajasthani Story by L. K. Ranga "Hindi & English Tranversion by Rajni Chhabra

लोरी---एक राजस्थानी लघुकथा
फुटपाथ पर जीवन बितानेवाली एक गरीब औरत,भूखे बालक को गोद में लिए बैठी थी.भूखे बालक की हालत बिगड़ती जा रही थी.
थोड़ी दूरी पर,बरसों से जनता को सुंदर,सुंदर,मीठे मीठे सपने दिखने वाले नेताजी भाषण बाँट रहे थे.
भाषण के बीच में बालक रो दिया.माँ ने कह,"चुप,सुन,नेताजी कितनी मीठी लोरी सुना रहें हैं." नेताजी कह रहे थे,"मैं देश से गरीबी-महंगाई मिटा दूंगा.देश फिर से सोने की चिड़िया बन जायेगा,घी दूध की नदियाँ बहेंगी
.कोई भूखा नहीं मरेगा...."
यह सुन कर खुश होती हुई माँ ने सुख समाचार सुनाने के लिए,बालक को झकझोरा.बालक भूख से मर चुका था.
लेखक:श्री लक्ष्मीनारायण रंगा
अनुवाद :रजनी छाबड़ा 


LULLABY
 A destitute woman, dwelling on foot-path, was sitting, holding the hungry child in her lap. Condition of the child was worsening.

Not far away, a leader, very apt in art of showing public enchanting, sweet dreams, was delivering a speech.

The child started crying during speech of leader. Mother told him, " Be quiet and listen. How sweet is lullaby of our leader! Leader was saying, " I will eradicate poverty and dearness from our country and turn it again into the golden sparrow, Rivers of ghee and milk will flow; nobody will die of starvation...."

Pleased with this speech, mother  shook the child to narrate him this good news. The starving child had already breathed his last.

Monday, November 2, 2009

TERE INTEZAAR MAIN

तेरे इंतजार में
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आ,तूं,लौट आ
वरना  में यूं ही
जागती  रहूँगी
रात रात भर
मिटाती रहूँगी
लिख लिख के
तेरा नाम
रेत पे
और  हर सुबह
सुर्ख उनीदी आँखों से,
नींद से बोझिल पलकें लिए
काटती रहूँगी
कैलेंडर से
एक ओर तारीख
इस सच का सबूत
बनाते हुए, कि
एक और रोज़
तुझे याद किया,
तेरा नाम लिया
तुझे याद किया
तेरा नाम लिया.

Friday, October 30, 2009

TUMHI BATAO NA

तुम्ही बताओ ना
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मेरी नींद को पंख लगे जब
क्या तुम्हारी भी संग
उड़ा  ले गयी

या फिर अधजगी रातों  में
तारे गिनने की रस्म
मैं इकतरफा निभा गयी




Thursday, October 29, 2009

ज़िन्दगी एक ग़ज़ल थी

ज़िन्दगी एक ग़ज़ल थी
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ज़िन्दगी एक ग़ज़ल थी
अब अफसाना बन गयी
नियामत थी साथ तेरे
बाद तेरे सांस लेने का
बहाना बन गयी


रजनी छाबड़ा 

Wednesday, October 28, 2009

AAS KA PANCHI

आस का पंछी
मन इक् आस का पंछी
मत क़ैद करो इसे
क़ैद होंने के लिए
क्यां इंसान के
तन कम हैं