Wednesday, January 15, 2025

ज़रा सोचो (सिराइकी में मेरी कविता )

 ज़रा सोचो (सिराइकी में मेरी कविता )


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दूजियाँ कुं ठोकरां मारण वालयों 

ज़रा सोचो हेक पल वास्ते 

पराये दर्द दा एहसास 

चुभसी तुहानकु वी 

जख़्मी थी वेसण 

तुहाडे हि पैर जदूं 

दुजिया नु ठोकरा मारदे मारदे/


रजनी छाबड़ा 

दिल दे मौसम (सिराइकी में मेरी कविता )


दिल दे मौसम (सिराइकी में मेरी कविता )

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 थींदी हे कदे 

फूलां तुं 

कंडियां वरगी चुभन 

कदे कंडिया वेच 

फुल खिड़दे ने 


बहार वेच विराणा  

कदे विराणे  वेच  

बहार दा एहसास 

एह दिल दे मौसम 

ईवेन बेमौसम 

बदलदे रेह्न्दे /

Tuesday, January 14, 2025

दीवार( सिराइकी में मेरी कविता )

 दीवार  ( सिराइकी में मेरी कविता )

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घर दे वेह्ड़े वेच 

दीवार चनीज़ वेंदी हे 

जदूं दिलां वेच 

दरार पे वेंदी हे 


बटवारे दा  दरद 

सेंहदी मज़बूर माँ 

किंदे नाल रवें 

किथे वंजे 


दीवार दे दूजे सिरे 

गूँजदी बच्चे दी किलकारी 

अगे वधंण वासते बैचैन क़दम 

ऱोक घिनदी है जबरन 


पर किया रोक सकसी 

आपणे मन दी उडारी 


मन दे पँख लगा 

घुम आउंदी हे 

दीवार दे दूजे पार 

उनींदरी रातां वेच 
  
सुफ़ने सजा के 

 देंदी हे 

अपणी  बेवज़ह ज़िंदगानी कुं 

हेक वज़ह /


रजनी छाबड़ा 

वगदी नदी / बहती नदिया

 Friends,you can view same poem in Roman  English, just below Hindi poem


  वगदी नदी / बहती नदिया  (सिराइकी और हिंदी में मेरी कविता )


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होले होले वगदी नदी 

आपणी मस्ती वेच गुनगुणादी 

मगरूर, मुलकदी 

वगदी वैंदी 


मैं हुंकु रोकिया, टोकिया 

ईतनी उतावली क्या मचि हे 

किथान वनजण  दा  इरादा हे 

किता  किसे नाल कोई वादा हे 


नदी थोड़ा झिझकी 

थोड़ा शरमायी 

समंदर नाल मिलण दी आस हे 

इयो ही मैडी रवानगी दा  राज़ हे 


मैं चेताया हुंकु 

क्या सोचिया हे तु कदे 

समंदर नाल मेल कर के  

ग़ुम थी  वैसी तैडी अपणी पछाँड़ 

तैडी अपणी मीठास 



पर उह परेम पगली ने 

ना रोकी अपणी रवानगी 

मिठास दी तासीर ग़ुम थी गयी

ख़ारे पाणी वेच मिलयां बाद 

समंदर दी आग़ोश वेच वनजण तुं बाद  

ख़तम कर दिती अपणी रवानी 

अपणी ज़िंदगानी /

रजनी छाबड़ा 




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बहती नदिया 

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कल कल बहती नदिया 

अपनी धुन में गुनगुनाती 

इठलाती, मुस्कुराती 

बहे जा रही थी 


मैंने  उसे रोका और टोका 

इतनी उतावली क्यों हो 

कहाँ जाने का इरादा है 

क्या किसी से कोई वादा है 


नदिया कुछ झिझकी 

सिकुची, शरमाई 

सागर से मिलने की आस है 

यही मेरी रवानगी का राज़ है 


मैंने चेताया  उसे 

क्या सोचा हैं तुमने  कभी 

सागर से मिल कर 

 खो देगी तुम निजता 

अपनी मिठास 

सहजता और सरसता 


पर उस प्रेम दीवानी ने 

नहीं रोकी अपनी रवानी 

मिठास का गुण खो दिया 

ख़ारे पानी में विलीन हो गया 

सागर की आगोश में जाने के बाद 

और ख़तम कर ली अपनी रवानी 

अपनी ज़िंदगानी 

रजनी छाबड़ा 


Kl kl bahtee nadia

Apnee dhun mein gungunati

Ithlatee, muskurati

Bahe Jaa rhee thee


Maine usko roka aur toka 

Itnee utawali kyon ho

Kahan Jane ka irada hai

Kya kisee se koi vada hai


Nadia kuch jhijhaki

Sikuchee, sharmayee

Sagar se milne kee aas hai

Yahi meri rawangee ka raaz hai


Maine chetaya usko

Kya socha hai tumne kabhi

Sagar se mil kr 

Kho dogi tum nijtaa

Apnee mithaas

Sahjata aur sarasta


Pr us Prem deewani

Ne nahi roki apnee rawani

Mithaas ka goon kho diya

Khare panee mein vileen ho gaya

Sagar kee aagosh mein  jane ke baad  

Aur khatam kr lee apnee rawani 

Apnee zindganee.

Rajni Chhabra 


























 











Kl kl bahtee nadia

Apnee dhun mein gungunati

Ithlatee, muskurati

Bahe Jaa rhee thee


Maine usko roka aur toka 

Itnee utawali kyon ho

Kahan Jane ka irada hai

Kya kisee se koi vada hai


Nadia kuch jhijhaki

Sikuchee, sharmayee

Sagar se milne kee aas hai

Yahi meri rawangee ka raaz hai


Maine chetaya usko

Kya socha hai tumne kabhi

Sagar se mil kr 

Kho dogi tum nijtaa

Apnee mithaas

Sahjata aur sarasta


Pr us Prem deewani

Ne nahi roki apnee rawani

Mithaas ka goon kho diya

Khare panee mein vileen ho gaya

Sagar kee aagosh mein  jane ke baad  

Aur khatam kr lee apnee rawani 

Apnee zindganee.

Rajni Chhabra 


























 








Sunday, January 12, 2025

मन दे बंद दरवाज़े / मन के बंद दरवाज़े ( सिराइकी और हिंदी में मेरी कविता )

 

मन दे बंद दरवाज़े / मन के बंद दरवाज़े ( सिराइकी और हिंदी में मेरी कविता )


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एस तुं पेहले कि 

अधूरेपण दी क़सक 

तुहानकु चूर चूर करें 

सारी उमर हसण खेलण तुं 

मज़बूर कर देवें 

खोलो अपणे 

मन दे बंद दरवाज़े 

ते दूर कर सटो 

घुटन कुं 



दर्द दा वसेरा तां 

सभाँ दे दिल वेच हे 

दर्द नाल सभाँ दा 

पुश्तैनी रिश्ता हे 

कुझ अपणी आखो 

कुझ उंहा दी सुणो 

दर्द कुं सब मिलजुल के सहो 

एस तुं पहलां कि दर्द 

रिसदे रिसदे बण वंजें नसूर 

लगा के हमदर्दी दा मल्हम 

करो दर्द कुं कोसां दूर 


वंड घिनो 

सुख दुःख कुं 

मन कुं , ज़िंदगी कुं 

पियार दे अमृत नाल 

करो चा भरपूर 

खोल सटो मन दे बंद दरवाज़े 

ते घुटन कुं करो चा दूर /


 मन के बंद दरवाज़े 

****************

इस से पहले कि

 अधूरेपन की कसक 

तुम्हें कर दे चूर-चूर

 ता-उम्र हँसने से कर दे मज़बूर 

खोल दो

 मन के बंद दरवाज़े 

और घुटन को

 कर दो दूर 


दर्द तो हर दिल में बसता है

 दर्द से सबका पुश्तैनी रिश्ता है 

कुछ अपनी कहो 

कुछ उनकी सुनो 

दर्द को सब मिलजुल कर सहो

 इस से पहले कि दर्द

 रिसते-रिसते बन जाए नासूर 

लगाकर हमदर्दी का मरहम 

करो दर्द को कोसों दूर

 बाँट लो

 सुख-दुःख को 

मन को, जीवन को 

स्नेहामृत से कर लो भरपूर 

खोल दो मन के बंद दरवाजे 

और घुटन को कर दो दूर /


तैडे बिना/तेरे बिना ( सिराइकी और हिंदी में मेरी कविता )


तैडे बिना/तेरे बिना  (सिराइकी और हिंदी में मेरी कविता )

तैडे बिना 

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तैडे बिना 

हिक़ इवें 

अमूझना रेहंदा हे 


दिन उगदे हि 

शाम ढलण दी 

उडीक रेहँदी हे / 



 तेरे बिना 

*******

तेरे बिना 

दिल यूं 

बेक़रार रहता है 

दिन उगते ही 

शाम ढलने का 

इंतज़ार रहता है /



तैडे बिना 

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तैडे बिना 

हिक़ इवें 

अमूझना रेहंदा हे 


दिन उगदे हि 

शाम ढलण दी 

उडीक रेहँदी हे / 


Saturday, January 11, 2025

चौराहा ( सिराइकी और हिंदी में मेरी कविता )

  चौराहा ( सिराइकी और हिंदी में मेरी कविता )


कैड़ा रस्ता चुण्यै 

पशेमानी दे चौराहे ते खड़े 

असां नयि सोच सकदे 


अतीत दियां कुझ हसीन यादां 

कुंझ खट्टे मिठे तज़ुर्बे 

बीत गए कल नाल जुड़ाव 


अतीत दे धागियां वेच उलझे 

आपणे आज कुं नयि जी सकदे  असां 

आ गया हे उमर दा  ओ पड़ाव 

अगे वधण तुं पहले ही 

बंधी बंधी थी वैंदी हे चाल 


नहीं कठा कर  पांदे 

आवण वाले कल दी 

चुनौतियां दा  सामना 

करण दी हिम्मत 

रब जाणे, क्या भेद छुपे होवण 

आण  वाले समे वेच 


कल , अज ते कल दे 

ताने बने वेच जकड़े 

आपने आले दुवाले 

अपनें ही कमां दे जाल वेच 

मकड़ी वरगा उलझे 

मुक्ति दा रस्ता 

साकूं इ बणावणा पैसी 


बीते समयाना दे  कुंझ यादगार पल 

अज दे कुझ सुनहरी पल 

आवण वाले वक़त वास्ते कुझ जुगाड़ 

सहेज के आपणी राह -खर्ची 

अगे वधदा चल 

ओ मुसाफ़िर 

रस्ता तेंकु आपणे आप रस्ता देसी 

मंजिल तकण पहुँचण वास्ते /


 

चौराहा 

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कौन सी  राह चुनें 

असमंजस के चौराहे पर खड़े 

 नहीं सोच पाते हैं हम 


अतीत की कुछ हसीन यादें 

कुछ खट्टे मीठे अनुभव 

बीते कल से जुड़ाव 


 

अतीत के धागों में उलझे 

अपने आज को ही नहीं जी पाते हम 

आ गया है उम्र का वह पड़ाव 

आगे बढ़ने से पहले ही 

बंधी बंधी हो जाती है चाल 


नहीं बटोर पाते 

आने वाले कल की 

चुनौतियों का सामना 

करने का साहस 

जाने क्या रहस्य छुपे हों 

भविष्य  की आगोश में 


भूत, वर्तमान और भविष्य  के 

ताने, बाने में  जकड़े 

अपने इर्द गिर्द व्यवस्तता के 

अपने ही बनाये जाल में 

मकड़ी से उलझे 

मुक्त गति की राह अब 

हमें ही  बनानी होगी 


अतीत के कुछ यादगार लम्हें 

वर्तमान के कुछ स्वर्णिम पल 

भविष्य की कुछ योजनाएँ 

सहेज कर अपने पाथेय में 

आगे बढ़ता चल 

ओ! राही 

राह तुम्हे खुद राह देगी 

मंज़िल तक पहुँचने की 


रजनी छाबड़ा 

बहु भाषीय कवयित्री व् अनुवादिका 





रजनी छाबड़ा 

बहु भाषीय कवयित्री व् अनुवादिका