शिव भजन
*********
अमृत जग में बाँट के, विष का प्याला पीने वाले
नीलकंठ , हे, नीलकंठ !
भक्तों की खुशियों में , खुश हो के जीने वाले
नीलकंठ , हे, नीलकंठ !
जटाओं में पावन गंगा विराजे
कंठ में सर्प का हार साजे
*********
अमृत जग में बाँट के, विष का प्याला पीने वाले
नीलकंठ , हे, नीलकंठ !
भक्तों की खुशियों में , खुश हो के जीने वाले
नीलकंठ , हे, नीलकंठ !
जटाओं में पावन गंगा विराजे
कंठ में सर्प का हार साजे
*********
अमृत जग में बाँट के, विष का प्याला पीने वाले
नीलकंठ , हे, नीलकंठ !
भक्तों की खुशियों में , खुश हो के जीने वाले
नीलकंठ , हे, नीलकंठ !
जटाओं में पावन गंगा विराजे
कंठ में सर्प का हार साजे
भभूत का श्रृंगार किये तुम
मृग छाल के आसन पर विराजे
अपनी धुन में मगन तुम
डम -डम डमरू बाजे
तुम बसते रोम रोम, सृष्टि के घट घट
हर लेना मेरी विपत्ति विकट