Thursday, January 23, 2025

फैशन


फैशन 

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जे जिसम दी नुमाईश ही 

फैशन हे 

असां  डाढे अभागे हां 


जानवर ऐस दौड़ वेच 

असां तुं अवल्ल निकल गए/


रजनी छाबड़ा 


नवीं पछाण

 

नवीं पछाण 

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अँधेरे कु 

आपणे आप  वेच समेटे 

जिवें दीवा बणांदा हे 

अपनी रोशन पछाण 



ईवेन ही  तुसा 

अथरू समेटे रखो 

अपणे वेच 

दुनिया कु डियो 

बस मुसकान  



आपणी अनाम ज़िंदगी कुं 

ईवेन डियो नवीं पछाण /


रजनी छाबड़ा 

आज़ाद

 आज़ाद 

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झरने वांकु कलकल 

पंछियां वांकु चहक 

आज़ाद उडारी 

चंदनी हवा 

सावणी फ़ुहार 

इहो टैडी 

हँसी दी पछाण 



मोतियाँ वाले घर दा 

दरवाज़ा खोल चा 

नक़ली  मुलकना  

छोड़ चा/


रजनी छाबड़ा 



आस दा पंछी

आस दा पंछी 

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मन 

हेक आस दा पंछी 

न क़ैद करो हिंकु 

क़ैद थीवण वास्ते 

किया इंसान दा ज़िस्म  

घट हे/


रजनी छाबड़ा 

Wednesday, January 22, 2025

निखरी निखरी






 निखरी निखरी 

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सर्द रातां दे बाद 

ओस वेच नहावण दे बाद 

जद अधखिली कली 

शबनमीं धुप वेच 

अपणा चेहरा सुखांदी हे 

क़ायनात निखरी निखरी 

नज़र आवन्दी हे /


रजनी छाबड़ा 

बंदगी

 बंदगी 

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एहसास  कदे वी मरदे नहीं 

एहसास ज़िंदा हेन 

तां ज़िंदगी हे 


वक़्त दी झोली वेच समेटे 

पल पल दे एहसास 

रब दी बंदगी हेन /


रजनी छाबड़ा 


एह चाहत

 एह चाहत

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 एह चाहत मैडी तैडी 

जे एह सोहणा सुफ़ना हे 

नींदर खुले न कदे मैडी 

जे एह हक़ीकत हे 

नींदर कदे न आवे मैंकु /


रजनी छाबड़ा