मन और आंखों
के बीच
गहरा रिश्ता है
मन का नासूर
आँखों से
अश्क बन
रिश्ता है
Sunday, August 16, 2009
Friday, August 14, 2009
वतन की आन
विजय दिवस पर अमर जवानों को समर्पित
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वतन की आन
----------------
जिन्हें प्यारी होती है
देश की आन
उनके लिए क्या
मायना रखती है
अपनी जान
मारेंगे या
मर मिटेंगे
हो जायेंगे कुर्बान
उनकी शहादत से
सलामत रहेगी
देश की शान
रजनी छाबड़ा
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वतन की आन
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जिन्हें प्यारी होती है
देश की आन
उनके लिए क्या
मायना रखती है
अपनी जान
मारेंगे या
मर मिटेंगे
हो जायेंगे कुर्बान
उनकी शहादत से
सलामत रहेगी
देश की शान
रजनी छाबड़ा
Monday, August 10, 2009
लहेरें
सांझ का धुंधलका
सघन
सागेर की लहरें
और
हिचकोले लेता
तन मन
संग तुम्हारे
महसूस किया
मन ने
सागर मैं
saagar sa vistaar
असीम खुशियाँ
अनंत
प्यार
वक्त के
बेरहम
सफर
मैं
तुम, ज़िन्दगी की
सरहद
के
उस पार
सांझ के तारे
मैं
करती हूँ
तुम्हारा
दीदार
सागर आज भी वही है
वही है
सांझ का धुंधलका
सघन
हलचल नही है
लहरों
मैं
सतह लगती है
ठहरा सागर
गहरा मन
रवां
है
मन के
ashant
vicharon
ka manthan
सघन
सागेर की लहरें
और
हिचकोले लेता
तन मन
संग तुम्हारे
महसूस किया
मन ने
सागर मैं
saagar sa vistaar
असीम खुशियाँ
अनंत
प्यार
वक्त के
बेरहम
सफर
मैं
तुम, ज़िन्दगी की
सरहद
के
उस पार
सांझ के तारे
मैं
करती हूँ
तुम्हारा
दीदार
सागर आज भी वही है
वही है
सांझ का धुंधलका
सघन
हलचल नही है
लहरों
मैं
सतह लगती है
ठहरा सागर
गहरा मन
रवां
है
मन के
ashant
vicharon
ka manthan
नजरिया
ज़िन्दगी के फिसलते लमहे
आँचल मैं न
समेत पाने की कसक
बदला नज़र आता है
वक्त का नजरिया
पूरे गिलास मैं सिमटा
आधा पानी
मन की तरंग मे दिखता
आधा भेरा
रीते लम्हों में
आधा खाली
आँचल मैं न
समेत पाने की कसक
बदला नज़र आता है
वक्त का नजरिया
पूरे गिलास मैं सिमटा
आधा पानी
मन की तरंग मे दिखता
आधा भेरा
रीते लम्हों में
आधा खाली
होने से,न होने तक
होने से
न होने
तक का
अन्तराल
गहरे समेटे
अपरिमित सवाल
वापिस ही
ले लेना है
तब देते ही
क्यों हो
न मिली होती
फिरदौस
न कचोटता
लुटने का
एहसास
न होने
तक का
अन्तराल
गहरे समेटे
अपरिमित सवाल
वापिस ही
ले लेना है
तब देते ही
क्यों हो
न मिली होती
फिरदौस
न कचोटता
लुटने का
एहसास
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