Monday, November 2, 2026

आओ पास , कुछ ख़्वाब बुने

 

 आओ पास , कुछ ख़्वाब बुने 

**********************

आओ पास , कुछ ख़्वाब बुने 

तुम कुछ न  कहो, फिर भी हम सुनें 


मखमली धूप हो, गुनगुनाती हवाएं 

हम हाथों में ले हाथ चलें  


झील का  किनारा हो, चढ़ते सूरज का नज़ारा हो 

दिन भर तू  साथ रहे और दिन कभी न ढले 


या फिर गहरा  आसमान और सितारों भरी रात  हो 

साथ रहो  हरदम तुम मेरे, क़यामत की रात हो/

रजनी छाबड़ा 

तुम से यह कैसा नाता है

 तुम से यह कैसा नाता है 

*********************

तुम से यह कैसा नाता है 

खुशियाँ तुम्हें मिलती हैं 

दामन मेरा भर जाता है 


करवटें तुम बदलते हो 

सुकून मेरा छिन जाता है 


आहत तुम होते हो 

आब मेरी आँखों में 

उभर जाता है 


तुम्हारी आंखों से 

अश्क़ छलकने से  पहले 

अपनी पलकों में समेटने को 

जी चाहता है 


अठखेलियाँ  करती लहरों में 

क्यों तेरा अक्स नज़र आता है 


खामोश फ़िज़ाएं 

गुनगुनाने लगती हैं 

तेरा ख्याल 

मुझ में रम जाता है 


कानों में सुरीली 

घंटियाँ सी बजती हैं 

जब तेरी आवाज़ का 

जादू छाता है


ज़िंदगी का आधा खाली जाम 

आधा भरा नज़र आता है 


अनाम रिश्ते को 
नाम देने की कोशिश में 
शब्दकोश रीत जाता  है 


तुम्हीं कहो ना 

तुम से यह कैसा नाता है ?


 रजनी छाबड़ा