Monday, November 2, 2026

आओ पास , कुछ ख़्वाब बुने

 

 आओ पास , कुछ ख़्वाब बुने 

**********************

आओ पास , कुछ ख़्वाब बुने 

तुम कुछ न  कहो, फिर भी हम सुनें 


मखमली धूप हो, गुनगुनाती हवाएं 

हम हाथों में ले हाथ चलें  


झील का  किनारा हो, चढ़ते सूरज का नज़ारा हो 

दिन भर तू  साथ रहे और दिन कभी न ढले 


या फिर गहरा  आसमान और सितारों भरी रात  हो 

साथ रहो  हरदम तुम मेरे, क़यामत की रात हो/

रजनी छाबड़ा 

No comments:

Post a Comment