सुकून के लिए
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निगाहों को झुकाये रखने की आदत डालिये
जाने कब कौन क्या कयास लगा डाले
जुबां को खामोश रहने की आदत सी हो गयी
दुनिया ने इतने बेगैरत सवाल उछाले
अब तो फूँक फूँक कर कदम उठाने पड़ते है
दुनिया ने राह में इतने शूल बिछा डाले
भूल जाना बेहतर हैं उन्हें
जिन्होंने आपकी राहों में पत्थर उछाले
सुकून के लिए याद रखिये उन्हें
जिन्होंने सहलाये आप के पावों के छाले
रजनी छाबड़ा