तुम मेरी राहत हो गए , तुम मेरी चाहत हो गए
तुम मेरी इबादत , तुम मेरी आयत हो गए
ज़मीन से फ़लक तलत, जहां भी नज़र जाए
हर तरफ, हर सू , तू ही तू नज़र आये
मंज़िल का अब कोई ठिकाना नहीं
कदम कहीं जाये, दिल कहीं और ले जाये
इश्क़ की राह पर चलते चलते
ज़माने के कितने दस्तूर ठुकराए
तुम हमराह, हम सफर क्या हुए
हम बैठे हैं खुद को भुलाये/
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