Wednesday, September 23, 2026

आग़ोश में लिया है तुम्हें जब


आग़ोश में लिया है तुम्हें जब

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 आग़ोश में लिया है तुम्हें जब

सारी क़ायनात का नूर बाँहों में सिमट आया  है  


तुम  हो हर सू और तेरे इश्क़ का साया है 

ज़ुबां खामोश है, ख़ामोशी को जुबां मिलने लगी है 

तेरे इश्क़ का अजब जादू छाया है 


होश में भी तुम, बेख़ुदी में भी तुम 

सिवा तेरे कुछ न नज़र आया है 


तुम मेरे ख्वाबों की हद, मेरे प्यार की सरहद 

कुछ इस के पार नहीं नज़र आया है/


रजनी छाबड़ा 

24/6/2026

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