Wednesday, July 12, 2017

तुम्हारे नयन

तुम्हारे नयन 

तुम्हारे नयन 
जानते हैं 
मुस्कान की भाषा 
चेहरे से 
दिल का हाल 
पढ़ने का हुनर 
कुछ तो जादुई है 
तुम्हारी चम्पई सूरत 
और मूमल सरीखी सीरत में 
ओ! मेरी प्रियतमा ------

तुम जानती हो सब 
परायों को अपना बनाने 
का सम्मोहन मंत्र 

कितना ही चाहूँ मैं 
होश में रहना 
पर तुम जानती हो 
पल छिन में 
खुद में समेट  लेने 
का करतब 
तुम 
केवल तुम नहीं हो 
तुम से ही 
मेरी  पहचान 
और मेरी दुनिया की शान 
ओ! मेरी प्रियतमा ------
तुम हँस दो
तो
मुस्कुराती है मेंरी
समूची दुनिया

तुम्हारी कोकिला सी
सुमधुर कुहुक
शीतलता बरसाती है
मेरे हृदय की तपिश पर

तुम रूठो गर
लगता है
थम जाएंगी मेरी साँसे

मेरी सांसों की सुरक्षा
तो
अब तुम्हारी आखों के
रक्तिम डोरों के
हवाले है/


थम जावे सांसां ; मूल राजस्थानी काव्य कृति  -रवि पुरोहित
हिंदी अनुकृति   ; रजनी छाबड़ा 

Saturday, July 8, 2017

दिल का तो मालूम नहीं, ज़हन अभी जवान है
या खुदा! तेरी रहमत से इसकी शान है/

Thursday, June 29, 2017

अभी जीने दो

अभी जीने दो 

अभी जीना है मुझे 
सुलझाने हैं 
ज़िन्दगी के कुछ 
पेचीदा ख़म 
तुम गर 
आ भी जाओ 
ओ यम !
कुछ देर के लिए 
जाना थम 


रजनी छाबड़ा 


Thursday, June 8, 2017

गुनगुनाती फ़िज़ाएं

दिल ढूँढ़ता हैं फिर वही फुरसत के रात दिन 


गुनगुनाती फ़िज़ाएं
 कुनमुनाती धुप

सुकून का बोलबाला
और हाथ में गर्म चाय का प्याला
मेहरबान रहे बस यूँ ही ऊपरवाला 

Wednesday, May 17, 2017

जज़्बात बहते हैं

जज़्बात  बहते हैं

मैं लिखती नहीं
कागज़ पर
मेरे जज़्बात
बहते हैं


कह न पायी
जो कभी दबे होंठों से
वही अनकही
कहानी कहते हैं /

रजनी छाबड़ा


Saturday, May 13, 2017

माँ

मातृत्व का अर्थ
जीवन का विस्तार
स्नेह, प्यार, आधार
विश्वास अपरम्पार
त्याग, सामंजस्य का भण्डार
सृजन से, विलीन होने तक
इस ममत्व का कभी न होता अंत
माँ जाने के बाद भी
आजीवन बसर करती
 यादों में अनंत

रजनी छाबड़ा