Friday, November 6, 2009

लोकतंत्र

लोकतंत्र

एक निर्वाचित सदस्य ने दूसरे से पूछा,"तुम्हे कितने वोट मिले? 'दूसरे ने फट से जवाब दिया,"मुझे वोट मिलते नहीं, मैं तो वोट ले लेता हूँ, वोट मांगना मैं हराम समझता हूँ"
यह कहता कहता, वह हँस रहा था.मालूम नहीं किस पर.वोटरों पर ?चुनाव पर? लोकतंत्र पर ?
राजस्थानी लोक कथा
लेखक:श्री लक्ष्मी नारायण रंगा
अनुवादिका :रजनी छाबड़ा .

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कैसा विचलन

कैसा विचलन
विस्तृत धरा का
हर एक कोना
कभी न कभी
प्रस्फुटित होना
कंटीली राहों से
कैसा विचलन
सुनते हैं
काँटों में भी है
फूल खिलने का चलन


रजनी छाबड़ा