Thursday, February 25, 2010

सुकून में कहाँ वो मज़ा

सुकून में कहाँ वो मज़ा


सुकून में कहाँ वो मज़ा
जो देती है बेताबी
जूनून देता है बेताबी
हर पल पाने को कामयाबी
सुकून है मंजिल
रास्ता है बेताबी

रजनी छाबड़ा 

2 comments:

  1. सुकून पल दो पल का जलाता है हमें
    बेताबियों का आलम रास आता है हमें
    अश्कों के तो किस्मत में है ही बेहना
    दो पल की हंसीं भी मार जाती है हमें

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  2. ...............................
    बहुत अच्छा लिखा हैं आपने.....सच में
    .....................
    जियेंगे गर बेताबी से
    तभी तो सुकून से मरने देगी दुनिया.....डिम्पल

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