Monday, June 4, 2012

kahan gaye wo din

कहाँ गए वो दिन जब नदियाँ शुद्ध जल दायिनी थी सुवासित बयार मन भावनी थी कहाँ गए वो दिन जब कोयल कूकती थी अमराइयों मैं बटोही सुस्ताया करते थे पेड़ों की शीतल छाया मैं

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