Wednesday, May 17, 2017

जज़्बात बहते हैं

जज़्बात  बहते हैं

मैं लिखती नहीं
कागज़ पर
मेरे जज़्बात
बहते हैं


कह न पायी
जो कभी दबे होंठों से
वही अनकही
कहानी कहते हैं /

रजनी छाबड़ा


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