तुम आ जाओ पास मेरे
स्वप्न अश्व पर सवार हो करएक लयमयी द्रुतगति से
तुम आ जाओ पास मेरे
धुन की नाव पर सवार हो कर
सुर ताल जगाते हुए
तुम आ जाओ पास मेरे
एक सूर्यकिरण का अनुगमन करते हुए
अपनी ओजस्विन मुस्कान के साथ
तुम आ जाओ पास मेरे
खुशियों से सरोबार
संग बसंत बहार
तुम आ जाओ पास मेरे
फूलों के बोझ से झुकी
शाखाओं का घूंघट उठाते हुए
तुम आ जाओ पास मेरे
तैरते हुए
एक जल परी सी
तुम आ भी जाओं ना
A TRANSVERTED POEM OF DR.SHYMAL MAJUMDER (ORIGINALLY COMPOSED IN BENGALI रजनी छाबड़ा
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