Wednesday, April 1, 2026

तुम आ जाओ पास मेरे

तुम आ जाओ पास मेरे

स्वप्न अश्व पर सवार हो कर
एक लयमयी द्रुतगति से

तुम आ जाओ पास मेरे
धुन की नाव पर सवार हो कर
सुर ताल जगाते हुए

तुम आ जाओ पास मेरे
एक सूर्यकिरण का अनुगमन करते हुए
अपनी ओजस्विन मुस्कान के साथ

तुम आ जाओ पास मेरे
खुशियों से सरोबार
संग बसंत बहार

तुम आ जाओ पास मेरे
फूलों के बोझ से झुकी
शाखाओं का घूंघट उठाते हुए

तुम आ जाओ पास मेरे
तैरते हुए
एक जल परी सी

तुम आ भी जाओं ना

A TRANSVERTED POEM OF DR.SHYMAL MAJUMDER (ORIGINALLY COMPOSED IN BENGALI रजनी छाबड़ा