Saturday, September 26, 2026

कृष्णा राधा 1

 कृष्णा राधा 

राधा कृष्णा 

दोनों को ही 

अनुराग की तृष्णा 

दोनों इक दूजे बिन अधूरे 

दीदार हो  इक दूजे का 

वही पल बस पूरे 


बांसुरी की धुन सुने बिन 

राधा , गोपियाँ 

सब के मन कमल मुरझाये 

सुने जब मधुर धुन बाँसुरी की 

कानों में अमृत घुल जाये 


कान्हा कहाँ छुपे हो तुम 

फूलों से लदी बेलों का 

घूँघट उठाते हुए आओ ना  

कानों में अमृत बरसाओ ना 


कजरारी रातें और काली हुए जाती है

अपनी सुरीली तान से 

अमावस को पूनम बनाओं ना 


ओ  मेरे कृष्णा,  ओ मेरे कान्हा 

वही मधुर धुन सुनाओ न 

तुम आओ ना, तुम आओ ना 


रजनी छाबड़ा 

10 /7/2026 






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